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आज भी मैं एक बच्चा हूँ

आज भी मैं एक बच्चा हूँ, आज भी मैं छुप के रोता हूँ, आज भी मैं कभी कभी डरता हूँ, आज भी वो लम्हे याद आते, सिकुड़ के सोना,बेबाक बोलना, किसी को सोचना,कभी कुछ न बोलना, वो यारो से मिलना,बेमतलब झगड़ना, वो खुद से बातें,वो बेपरवाह रातें, कल एक मेला था,आज एक भीड़ है, कल एक दौर था,आज एक दौड़ है, कल मैं मैं था,आज मैं बस नाम हूँ, लोग कहते हैं समझदार बनो, कुछ सोचो,कुछ समझो,बड़ी बात करो,कुछ ख्वाहिशें भी हैं,थोड़ा शोर भी है, कभी रुकना भी है,कहीं मज़िल भी है, पर आज भी एक मासूमियत है, पर आज भी एक शरारत है, Iशायद आज भी मैं एक बच्चा हूँ ........ Santoshktn.blogger.com By SK BHARTI

*बुद्ध पूर्णिमा पर्व और सयुक्त राष्ट्र संघ*

संयुक्त राष्ट्र संघ का संदेश है कि समाज को बांटने पर केंद्रित नफरत संबंधी बयानों और हिंसक संघर्षों के वर्तमान दौर में बुद्ध की शिक्षा करुणा और अहिंसा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बड़ी चुनौतियों से निबटने में मदद करती है। संयुक्त राष्ट्र संघ का मानना है कि भगवान बुद्ध की शिक्षा का प्रबल आधार   'विवेक" है जिससे अपने परिवार के साथ समाज को जोड़ने का सौभाग्य मिलता है यह सामूहिक जीवनपार्जन नीति है,।अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय चुनौतियों को  निबटने में बुद्ध की शिक्षा जितनी प्राचीन काल में प्रासंगीक थी, आज भी उत-निहि प्रासंगिक है।  बुद्ध कि शिक्षा सभी जीवों के लिए प्यार और करुणा का पाठ पढ़ाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने संदेश में आगे यह भी कहा है कि समस्याओं का समाधान "बौद्ध विवेक एक प्रबल स्त्रोत है" जो  'आंतरराष्ट्रीय वैशाख बुद्ध पूर्णिमा दिवस' है और यह दिवस सभी लोगों के प्रति करूणा अपनाने की याद दिलाता है जिसमें विभिन्न वर्गो में कट्टरता अस्वीकार करके सभी लोगों को समान रूप से गले लगाना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में विशेष तौर पर बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है जिसमे...

मेरी मां के लिए मेरे मन की बातें.......

मां तू ही आहट है,  तू नजाकत,तू ही हिमायत है मेरी। तू ही शराफत, तू शरारत,तू मोहब्बत है मेरी। तू ही जरुरत, तू गनीमत,तू शिकायत है मेरी। तू ही बनावट, तू सजावट,तू लिखावट है मेरी। तू ही रब की दया है,तू ही मेरी दुआ है। तू खुशियों की सदा है,तू दुखों की दवा है। तू लबों की हंसी है,तू आंखों की नमी हैं। तू प्यार की मूरत है,तू दिल की जरूरत है। तू ममता का सागर है,तू खुशियों की गागर है तू दुनिया में अनोखी है,तू सागर का मोती है। तू ज्ञान है मेरा, तू मान है मेरा। तूने सिखाया तो जीवन आसान है मेरा  मां तेरी दुआ से मैं खुश हूं। मां तेरी वजह से मैं खुश हूं। I love you maa........ Thanks for reading. ..
ये उन सभी मांओं के लिए, जो अपने बच्चों के लिए अपनी जान वार देने को तैयार है........ फूलों की खुशबू से चुराके खुशबू, मैं तुमको महकाऊं। मेरी जान के टुकड़े हो तुम, मैं तुमपे जान लुटाऊं। मैं मां हूं तुम्हारी,  मेरे बच्चे हो तुम, मैं जानती हूं , अभी छोटे थोड़े कच्चे हो तुम। पर तुम्हारी मां है तुम्हारे साथ , हर पल , हर कदम तुम्हारी रक्षा करूंगी मैं, जब तक है दम।तुम घबराना ना,  डर जाना ना,आंधियों से तूफानों से, मां की दुआएं तो रही है, बच्चों के साथ जमानो से। ना कभी मुश्किल में, होंसला हारो, मैं तुमको समझाऊं, मेरी जान के टुकड़े हो तुम, मैं तुमपे जान लुटाऊं।। Thanks for reading. ..

माँ के लिए एक सुन्दर कविता...

इस कविता के अंत में कोई कसम नहीं है क्योंकि ये कविता इतनी अच्छी है आप खुद शेयर किये बिना नहीं रह पाएंगे... लेती नहीं दवाई "माँ", जोड़े पाई-पाई "माँ"। दुःख थे पर्वत, राई "माँ", हारी नहीं लड़ाई "माँ"। इस दुनियां में सब मैले हैं, किस दुनियां से आई "माँ"। दुनिया के सब रिश्ते ठंडे, गरमागरम रजाई "माँ" । जब भी कोई रिश्ता उधड़े, करती है तुरपाई "माँ" । बाबू जी तनख़ा लाये बस, लेकिन बरक़त लाई "माँ"। बाबूजी थे सख्त मगर , माखन और मलाई "माँ"। बाबूजी के पाँव दबा कर सब तीरथ हो आई "माँ"। नाम सभी हैं गुड़ से मीठे, मां जी, मैया, माई, "माँ" । सभी साड़ियाँ छीज गई थीं, मगर नहीं कह पाई  "माँ" । घर में चूल्हे मत बाँटो रे, देती रही दुहाई "माँ"। बाबूजी बीमार पड़े जब, साथ-साथ मुरझाई "माँ" । रोती है लेकिन छुप-छुप कर, बड़े सब्र की जाई "माँ"। लड़त...

"मानवता ही श्रेष्ठ धर्म हैं"

*आजकल शादी-ब्याह का मौसम जोरों पर चल रहा हैं ।* कहते हैं शादी का लड्डू ऐसा हैं जो खाये वो पछताए जो न खाये वो भी पछताए ।कुछ बुद्धिजीवी और विद्वान सलाह देते हैं कि लड्डू खाकर ही पछताना चाहिए । लेकिन मेरी सलाह हैं कि शादी के लड्डू को पछताने वाला कतई भी नही बनाये इतनी काबिलियत खुद में तैयार कर ले कि जीवन-सफर ख़ुशी-ख़ुशी व्यतीत हो ।नींद से सुबह जैसे ही मेरी आँखे खुली पड़ोस से मधुर संगीत आवाज़ आया गीत चल रहा था - बाबुल की दुआये लेती जा जा तुझको .....** मुझे ख्याल आया कि इतना पुराना गीत, वह भी रुला देने वाला, इतने सालों बाद ? अब फिल्मों में नए गीत क्यों नही बनते ? बनते भी हैं तो बहुत ही कम ?**क्या अब फिल्मों में व्यवस्थित शादियाँ नही दिखाई जाती ?**आधुनिक युग में युवां-युवतियां शायद अब प्रेम-विवाह ज्यादा पसन्द करती हैं इसलिए माता-पिता भी शार्टकट पसन्द करते हुए विवाह कर देते हैं । इसलिए बिदाई के गीत नही के बराबर बन रहे हैं ।* *अंत में ! मैं तो चाहता हूँ कि बिदाई गीत भी बने , प्रेम- विवाह ( अंतर्जातीय विवाह ) भी हो ! प्रेमी-युगल को मनपसन्द हमसफ़र भी मिले लेकिन माँ-बाप की इज़ाजत से ।**और हर म...

14 अप्रैल ज्ञान दिवस पर विशेष

14 अप्रैल ज्ञान  दिवस पर विशेष विश्वपुरूष बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर जी के बारे में कुछ अनमोल रिश्ते Fact 1: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अपने माता-पिता की चौदहवीं और आखिरी संतान थे। Fact 2: डॉ. अंबेडकर के पूर्वज काफी समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी में एम्प्लोयेड थे और उनके पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी में Mhow cantonment में तैनात थे। Fact 3: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का मूल या ओरिजिनल सरनेम अंबावडेकर था। लेकिन उनके शिक्षक, महादेव आंबेडकर, जो उन्हें बहुत मानते थे, ने स्कूल रिकार्ड्स में उनका नाम अंबावडेकर से आंबेडकर कर दिया। Fact 4: बाबासाहेब मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दो साल तक प्रिंसिपल पद पर कार्यरत रहे। Fact 5: बाबासाहेब डॉ. बी. आर आंबेडकर भारतीय संविधान की धारा 370, जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता है के खिलाफ थे। Fact 6: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विदेश जाकर अर्थशास्त्र डॉक्टरेट (PhD) की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे। Fact 7: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अपने समय के सबसे जादा पढे-लिखे नेता और भारत के सबसे अधिक बुद्धिमान व्यक्ति थे। Fact 8: डॉ. आंबेडकर ही ए...

चलो इस दुनिया को हसीन बनाया जाय

चलो इस  दुनिया  को  कुछ  हसीन   बनाया जाय, किसी का दर्द बाँटकर होठों पे मुस्कान लाया जाय। कितनी  बर्बादी   है  खाने   की   इस   दुनिया   में, चलो  किसी  भूखे   को   भोजन   कराया   जाय। देखा  है  हमने   फ़टे-हाल   मेहनतकशों   को  भी, चलो  किसी की   चादर   में  पैब॔द   लगाया  जाय। हसीन   लगते   हैं   चाँद  और   सितारे   तो  बहुत, चलो इस  दुनिया  को भी कुछ हसीन बनाया जाय। बूँद-बूँद से ही भरता है घड़ा,ये करके दिखाया जाय, क्या होगा म॔दिरों में दान देकर,अस्पताल बनाया जाय। झुक  गई   है  जिनकी   कमर   बुढ़ापे  के  बोझ  से, चलो   उनके   साथ   दो   पल   ही   बिताया   जाय। ढहा  कर  नफ़रत  की  दीवारों  को   इस  दुनिया  से, चलो   इस  दुनिया  को   कुछ  हसीन  बनाया  जाय। Santoshktn.blogger.com By SK BHARTI

मेहनत से उठा हूँ, मेहनत का दर्द जानता हूँ

मेहनत से उठा हूँ, मेहनत का दर्द जानता हूँ, आसमाँ से ज्यादा जमीं की कद्र जानता हूँ। लचीला पेड़ था जो झेल गया आँधिया, मैं मगरूर दरख्तों का हश्र जानता हूँ। छोटे से बडा बनना आसाँ नहीं होता, जिन्दगी में कितना जरुरी है सब्र जानता हूँ। मेहनत बढ़ी तो किस्मत भी बढ़ चली, छालों में छिपी लकीरों का असर जानता हूँ। बेवक़्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्कुरा देता हूँ, आधे दुश्मनो को तो यूँ ही हरा देता हूँ!! काफी कुछ पाया पर अपना कुछ नहीं माना, क्योंकि एक दिन मिट्टी में मिलना है ये जानता हूँ। Santoshktn.blogger.com By SK BHARTI

शरीर के रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता "माँ की इच्छा"

     महीने बीत जाते हैं ,      साल गुजर जाता है ,      वृद्धाश्रम की सीढ़ियों पर,      मैं तेरी राह देखती हूँ।      आँचल भीग जाता है,      मन खाली खाली रहता है।                                     तू कभी नहीं आता ,    तेरा मनीआर्डर आता है।      इस बार पैसे न भेज ,       तू खुद आ जा ,      बेटा मुझे अपने साथ ,      अपने 🏡घर लेकर जा।   तेरे पापा थे जब तक ,   समय ठीक रहा कटते ,   खुली आँखों से चले गए ,   तुझे याद करते करते।                अंत तक तुझको हर दिन ,                बढ़िया बेटा कहते थे ,   ...

इंसानियत...

*मस्जिद पे गिरता है* *मंदिर पे भी बरसता है..* *ए बादल बता तेरा मजहब कौनसा है........।।* *इमाम की तू प्यास बुझाए* *पुजारी की भी तृष्णा मिटाए*.. *ए पानी बता तेरा मजहब कोन सा है.... ।।* *मज़ारो की शान बढाता है* *मुर्तीयों को भी सजाता है..* *ए फूल बता तेरा मजहब कौनसा है........।।* *सारे जहाँ को रोशन करता है* *सृष्टी को उजाला देता है..* *ए सुरज बता तेरा मजहब कौनसा है.........।।* *मुस्लिम तूझ पे कब्र बनाता है* *हिंदू आखिर तूझ में ही विलीन होता है..* *ए मिट्टी बता तेरा मजहब कौनसा है......।।* *ऐ दोस्त मजहब से दूर हटकर, इंसान बनो* *क्योंकि "इंसानियत" का कोई मजहब नहीं होता... ।।* *नमो बुद्धाय* *जय भीम* sntshbhartiya@gmail.com

एक कड़वा सच...

वो रस्सी आज भी  संग्रहालय में है जिससे गांधीजी बकरी बांधा करते थे, किन्तु वो रस्सी कहां है जिस पे भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु हँसते हुए झूल गए थे। " हालात-ए-मुल्क देख के रोया न गया... कोशिश तो की पर मुंह ढक के सोया न गया" देश मेरा क्या बाजार हो गया है ... पकड़ता हु तिरंगा  तो लोग पूछते है कितने का है... जाने कितने झूले थे फाँसी पर, कितनो ने गोली खाई थी.... क्यों झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी...                      "जय भीम नमो बुद्धाय"

हमारी अधूरी आजादी...

SK BHARTI भारत को स्वतंत्र हुए 69 साल बीत गए. कितने जोश और जुनून के साथ हर साल आज़ादी का जश्न मनाया जाता है, पर खुद की आज़ादी का जश्न कब मना पाएंगे देशवासी, आज भी एक बड़ा सवाल हमारे सामने है कि क्या सच में हम आज़ाद हैं? हमारा देश तो विदेशी हुकूमत से आज़ाद हो गया पर हमारे देश के लोगों की सोच अभी तक आज़ाद नहीं हो सकी है। अगर हमें बताया जाए कि 70 साल के स्व-शासन के बाद भी अमीर-गरीब के बीच बढ़ती असमानता में हम दुनिया के 188 देशों में 150वें नंबर पर हैं और यह खाई लगातार बढ़ती जा रही है, गलती किसकी है? हम हर पांच साल में सरकार चुनते हैं, लेकिन अपनी समस्याएं नहीं समझ पाते। ( Santoshktn.blogspot.com by SK BHARTI) अभी तक महफूज़ है एक धुंधली सी परिभाषा गणतंत्र यानी एक ऐसी व्यवस्था जहाँ सर्वोपरि होती है जनता जहाँ सारे फ़ैसले लेती है जनता और उनको लागू भी करती है जनता बचपन की दहलीज़ लांघते ही दुनियादार लोगों ने बताई एक नयी परिभाषा चूँकि जनता है अभी तक नादान नहीं आता उसको राजकाज चलाने का काम इसलिये फ़ैसले लेते हैं।जनता के नुमाइंदे जनता के नाम और वो उनको लागू करते हैं। जनता के नामवक़्त ...

तिरंगा: ‘राष्ट्रीय ध्वज’ से जुड़े 24 ग़ज़ब रोचक तथ्य

Facts about Indian Flag in Hindi –  तिरंगा: राष्ट्रीय ध्वज के बारे में रोचक तथ्य क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की हैं कि आखिर तिरंगा किसने बनाया ? क्या आपको पता हैं शहीदों पर लिपटे हुए तिरंगे का क्या होता हैं ? नही ना… आज हम आपको राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े तमाम ऐसे ही सवालों के जवाब देंगे। आइए पढ़ते हैं, तिरंगे की कहानी ग़ज़बहिन्दी की जुबानी… ( Santoshktn.blogspot.com By Sk bharti) 1. भारत के राष्ट्रीय ध्वज को "तिरंगा" नाम से भी सम्बोधित करते हैं. इस नाम के पीछे की वजह इसमें इस्तेमाल होने वाले तीन रंग हैं, केसरिया, सफ़ेद और हरा। 2. भारत के राष्ट्रीय ध्वज में जब चरखे की जगह अशोक चक्र लिया गया तो महात्मा गांधी नाराज हो गए थे। उन्होनें ये भी कहा था कि मैं अशोक चक्र वाले झंडे को सलाम नही करूँगा। 3. संसद भवन देश का एकमात्र ऐसा भवन हैं जिस पर एक साथ 3 तिरंगे फहराए जाते हैं। 4. किसी मंच पर तिरंगा फहराते समय जब बोलने वाले का मुँह श्रोताओं की तरफ हो तब तिरंगा हमेशा उसके दाहिने तरफ होना चाहिए। 5. राँची का 'पहाड़ी मंदिर' भारत का अकेला ऐसा मंदिर हैं ज...

तीन बातें...

बाबा  साहब ने कहा था कि, " ऐ मेरे पढे लिखे लोगों जो कारवाँ तुम आज यहाँ देख रहे हो इसे मैं बडी त्याग, तपस्या, बलिदान के साथ यहाँ तक लाया हूँ।" मैनें अपने चार बेटे खोये। मैनें अपनी पत्नी खोयी। मैनें अपना भाई परिवार खोया । मैनें अपना घर खोया। मैनें अपने दोस्त रिस्तेदार खोये। मैनें अपनी भूख, प्यास,स्वास्थ भी खोया। मैनें अपनी नींद,ऐसोआराम खोया। मैनें अपने आप को खोया तब जाकर ऐ कारवाँ हासिल  किया है मैं अपने पढे लिखे लोगों से बस तीन बाते कहना चाहता हूँ ? ☝�पहली बात :-- " अगर तुम इस कारवाँ को आगे बढा सको तो बढ़ाना, अगर नहीं बढा पाये तो किसी भी हाल में पिछे मत जाने देना।" ☝�दूसरी बात :-- " ऐ मेरे पढे लिखे लोगों जब पढ लिख लेना, कुछ बन जाना तो कुछ बुध्दी, पैसा, ज्ञान, हुनर, समय इस समाज को दे देना जिस समाज से तुम आये हो।" ☝�तीसरी बात :-- " यदि तुम इस जाति व्यवस्था, पुरानी रीतियों,रुढियों परम्पराओं तथा अंधविश्वास को खत्म न कर पाना तो अपनी जाति को और अपने आप को इतना महान बनाना की सभी जाति  तुम्हारी जा...

आरक्षण विरोधियों को लिखित जबाव:

"करता हूँ अनुरोध आज मेैं, भारत की सरकार से ! प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से !!" यहाँ से उत्तर काव्य में है :--- (santoshktn.blogspot.com By SK Bharti) ================= एकलव्य जब-जब पढ़ा स्वयं के सुधार से, कई द्रोणों ने काटे अंगूठे, आरक्षण की तलवार से, एकलव्य जब बिना द्रोण के, योग्य धनुर्धर यार हुआ, तब सोचो, द्रोण ने अर्जुन को फिर क्यों आरक्षण दिया ? सूत पुत्र कह के परशुराम ने कर्ण को जब ठुकराया था, क्या याद तुझे है, अज्ञानी, क्या कर्ण ने नहीं बताया था ? क्या प्रतिभा नहीं थी कर्ण के अंदर ? न ही जन्म से, सूत का जाया था ? फिर क्यों पापी, जातिवादी ने कर्ण को नहीं सिखाया था? जब आरक्षण की बात चली तो - शंकराचार्य का पद आरक्षित मुक्त करो ? जितने आलय हैं "पूरे देश में, आरक्षण से मुक्त करो ?" चाहे शिवालय, या देवालय, या मदिरालय, या विश्वविद्यालय, बिना आरक्षण नियुक्त करो, जब बात चली है आरक्षण की, तो धन, धरती को शून्य करो, जितनी जिसकी संख्या है, उसको उतना नियुक्त करो, और सारी धरती को, आरक्षण से मुक्त करो ? चाहे ज़िन्दा या हो मुर्दा, ...

माँ को समर्पित चंद लाइनें...

एक गाँव में 10, साल का लड़का अपनी माँ के साथ रहता था। ( Santoshktn.blogspot.com By S K Bharti ) माँ ने सोचा कल मेरा बेटा मेले में जाएगा, उसके पास 10 रुपए तो हो, ये सोचकर माँ ने खेतो में काम करके शाम तक पैसे ले आई। बेटा स्कूल से आकर बोला खाना खाकर जल्दी सो जाता हूँ, कल मेले में जाना है। सुबह माँ से बोला - मैं नहाने जाता हूँ,नाश्ता तैयार रखना, माँ ने रोटी बनाई, दूध अभी चूल्हे पर था..! माँ ने देखा बरतन पकडने के लिए कुछ नहीं है, उसने गर्म पतीला हाथ से उठा लिया, माँ का हाथ जल गया। बेटे ने गर्दन झुकाकर दूध रोटी खाई और मेले में चला गया। शाम को घर आया,तो माँ ने पूछा - मेले में क्या देखा,10 रुपए का कुछ खाया कि नहीं..!! बेटा बोला - माँ आँखें बंद कर,तेरे लिए कुछ लाया हूँ। माँ ने आँखें बंद की,तो बेटे ने उसके हाथ में गर्म बरतन उठाने के लिए लाई सांडसी रख दी। अब माँ तेरे हाथ नहीं जलेंगे। माँ की आँखों से आँसू बहने लगे। दोस्तों, माँ के चरणों मे स्वर्ग है, कभी उसे दुखी मत करो..! सब कुछ मिल जाता है, पर ...

कुछ बुद्धिमान बोलते है आरक्षण ने देश को बर्बाद कर दिया..आइये जानते हैं

S.K. BHARTI यदि आप मानते हो की आरक्षण की वजह से ही देश बर्बाद हुआ है, तो फिर यह पोस्ट सिर्फ आपके लिए ही है....जरूर पढ़ें " लश्कर भी तुम्हारा है , सरदार भी तुम्हारा है। तुम झूठ को सच लिख दो अखबार भी तुम्हारा है। तुम जो कहो वो सच, हम जो कहें वो झूठ मुल्क में नफरत का ऐसा तूफान मचा ड़ाला है।" कुछ बुद्धिमान बोलते है कि आरक्षण ने देश को बर्बाद कर दिया" 1. अब आप बताइये कि देश आजाद होने के बाद 14 व्यक्ति देश के राष्ट्रपति बने उनमे से कितने आरक्षण वाले बने.... 2. 15 प्रधानमन्त्री बने उनमे से कितने आरक्षण वाले बने... 3. 43 उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश बने कितने आरक्षण वाले बने... 4. 19 मुख्य चुनाव आयुक्त बने उनमे से कितने आरक्षण वाले बने... 5. देश के जो बड़े घोटाले हुए उनमे कितने दलित घोटालेबाज हैं, बताएं ज़रा... 6. आप बताइये भारत देश में कितने दलित लोग ऐसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों के व्यवसायी हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं ?( Santoshktn.blogspot.com  By Sk bharti) 7. अब आप बताइये देश को बर्बाद कौन कर रहा है....अगर सम्भावित ब्लैकमनी...

आरक्षण- आरक्षण-आरक्षण

*आरक्षण- आरक्षण-आरक्षण- नहीं!* *ये रियल रिप्रेझेंटेटिव्ह है।* *संख्याके अनुपात पे मिलनेवाला संविधानिक हक्क अधिकार है।* ( Santoshktn.blogspot.com by sk BHARTI)             *एक बार समय निकाल कर जरूर पढ़ें।* :::::::;:::::::::::;:::::::::::::::::                जो भी व्यक्ति *आरक्षण को खत्म* करने के लिए सोच रहे हैं वे लोग इस तर्क पर गौर अवश्य करें कि *आखिर क्या है आरक्षण ?* और यह खत्म कब होना चाहिए?                                                 *तर्क----* 1. *एक माँ अपने छोटे से बच्चे को दूध पिला रही थी* तभी उसके बड़े बच्चे की नजर पड़ गई जिसकी उम्र करीब पांच साल की रही होगी। *दूध पीते देख उसकी भी इच्छा जाग गयी कि माँ का दूध मुझे भी पिना चाहिए क्योंकि माँ सबके लिये बराबर होती है। वह माँ से बोला कि मुझे भी दूध पिलाओ हमारा भी हक बराबर का है* *माँ बोली - नही ।* *लडका बोला*- तो फिर *इसे भी दूध पिलाना बन्द करो।* तब *माँ बोली* - बेटा तुम इसी दूध को पीकर बड़े हो गए हो और हाँ *मैं इसे तब तक दुध पिलाती रहूँगी जब तक तुम्हारे बराबर न हो जाए l* *लड़का बोला - ये कब हमारे बराबर...

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