आहत न होना मैं दिल की खोल रहा हूँ । जय भीम दीदी मैं तेरा भाई बोल रहा हूँ । तेरा घर है तू सौ नहीं हज़ार बार आना । पर राखी बाँधने तू कल मत आना। ढोंग पाखन्ड से मुँह मोड़ चुका हूँ । ब्राह्मण वादी परम्पराओं से नाता तोड़ चुका हूँ । सरफरोसी जज्बा कौमी आदी हो गया है। तेरा भाई पक्का अम्बेडकर वादी हो गया है । तेरी रक्षा सुरक्षा से मुझे ऐतराज़ नही है । मगर मेरा फर्ज किसी राखी का मोहताज नही है। दुख दर्द पीर भारत की नारी का ले गये । बाबा साहब तो बिन राखी के सारे अधिकार दे गये। बिगड़ा हुआ कल था वो आज बना दिया है। बाबा साहब ने नारी को सरताज बना दिया है । मेरा साथ दे और तू भी अपना रुख मोड़ ले । दूज दिवाली होली मनाना तू भी छोड़ दे । नाराज न होना बहन मेरी परसों खुद लेने आऊंगा । प्रीत रीत और फर्ज अर्ज राखी बिन सभी निभाऊंगा। ( जय भीम ) Santoshktn.blogger.com By SK BHARTI